सिंदूर - कविता


 

‟सिंदूर“


सिंदूर जब समर्पण पर आ जाए,


तो पति परमेश्वर बन जाता है।


सिंदूर जब जिद पर आ जाए,


तो सावित्री बन जाता है।


सिंदूर की लाज बचाने मैं


रावण के कुल का नाश हुआ,


सिंदूर की खातिर ही


महाभारत का आगाज हुआ।


ये भारत केवल देश नहीं


स्वाभिमान है हम सभी का।


सिन्दूर हिमांशी का पोंछा जाता है..


तो प्रतिशोध  का नाम सोफिया होता है।




‟देवेश“